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شكر كز آن كان زر جعفرى | |
روى مرا نادره گازى رسيد |
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باد تكبر اگرم در سرست | |
هم ز دم اوست كه در من دميد |
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كرد مرا خشم مه و بر رخم | |
گنبد نيلى سره نيلى كشيد |
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باده فراوان و يكى جام نى | |
بوسه پياپى شد و لب ناپديد |
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اى شب كفر از مه تو روز دين | |
گشته يزيد از دم تو بايزيد |
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گو سگ نفس اين همه عالم بگير | |
كى شود از سگ لب دريا پليد |
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قفل خداييش بسى خون كه ريخت | |
خونش بريزيم چو آمد كليد |
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جان به سعادت بكشد نفس را | |
تا به هم افتند سعيد و شهيد |
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هيچ شكارى نرهد زان صياد | |
كو ز سگى هاى سگ تن رهيد |
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اى خرف پير جوان شو ز سر | |
تازه شد از يار هزاران قديد |
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وى بدن مرده برون آ ز گور | |
صور دميدند ز عرش مجيد |
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خامش و بشنو دهل خامشان | |
ايدك الله به عيش جديد |
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جاء نا ميزاننا كى نختبر اوزاننا | |
ربنا اصلح شاننا اوجد به عفو يا جواد |
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اضحكوا بعد البكاء نعم هذا المشتكى | |
قد خرجتم من حجاب و انتبهتم من رقاد |
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پارسى گوييم شاها آگهى خود از فواد | |
ماه تو تابنده باد و دولت پاينده باد |
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هر ملولى كه تو را ديد و خوش و تازه نشد | |
آب و نانش تيره باد و آتشش بادا رماد |
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خوابناكى كه صباحت ديد وز جا برنجست | |
چشم بختش خفته بادا تا الى يوم المعاد |
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جاء من يحيى الموات و الرميم و الرفات | |
ايها الاموات قوموا و ابصروا يوم التناد |
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طارت الكتب الكرام من كرام كاتبين | |
ايقظوا من غفله ثم انشروا للاجهتاد |
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جاء نا ميزاننا كى تختبر اوزاننا | |
ربنا اصلح شاننا اوجد به عفو يا جواد |
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اضحكوا بعد البكا يا نعم هذ المشتكا | |
قد خرجتم من حجاب و انتبهتم من رقاد |
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پارسى گوييم شاها آگهى خود از فواد | |
ماه تو تابنده باد و دولتت پاينده باد |
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هر ملولى كه تو را ديد و خوش و تازه نشد | |
آب نابش تيره باد و آتشش بادا رماد |
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خوابناكى كه صباحت ديد وز جا برنجست | |
چشم بختش خفته بادا تا الى يوم المعاد |
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با مليحا زاده الرحمن احسانا جديد | |
يا منيرا زاده نور على نور مزيد |
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خوشتر از جان خود چه باشد جان فداى خاك تو | |
خوبتر از ماه چه بود ماه در تو ناپديد |
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كل ذى روح يفدى فى هواك روحه | |
كل بستان انيق من جناك مستفيد |
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لست انكر ما ذكرتم البقاء فى الفنا | |
كل من ابدى جميلا ليس يبعد ان يعيد |
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اين ملولى مى كشد جان را كه چيزى تو بگو | |
هيچ كس را كس گريبان از گزافه كى كشيد |
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نوبت آدم گذشت نوبت مرغان رسيد | |
طبل قيامت زدند خيز كه فرمان رسيد |
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انت لطيف الفعال انت لذيذ المقال | |
انت جمال
الكمال زدت فهل من مزيد |
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از پس دور قمر دولت بگشاد در | |
دلق برون كن ز سر خلعت سلطان رسيد |
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جاء اوان السرور زال زمان الفتور | |
ليس لدنيا غرور يا سندى لا تحيد |
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ديو و پرى داشت تخت ظلم از آن بود سخت | |
ديو رها كرد رخت چتر سليمان رسيد |
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هل طرب يا غلام فاملا كاس المدام | |
انت بدار السلام ساكن قصر مشيد |
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عشق چه خوش حاكميست ظالم و بى قول نيست | |
حاجت لاحول نيست ديو مسلمان رسيد |
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يا لمع المشرق مثلك لم يخلق | |
خذ بيدى ارتقى نحوك انت المجيد |
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عاشق از دست شد نيست شد و هست شد | |
بلبل جان مست شد سوى گلستان رسيد |
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پرده برانداخت حور جمله جهان همچو طور | |
زير و زبر بست نور موسى عمران رسيد |
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هر چه خيال نكوست عشق هيولاى اوست | |
صورت از رشك حق پرده گر جان رسيد |
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هست تنت چون غبار بر سر بادى سوار | |
چونك جدا گشت باد خاك به ماچان رسيد |
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اعلم ان الغبار مرتفع بالرياح | |
مثل هوى اختفى وسط صياح شديد |
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فديت سيدنا انه يرى و يجود | |
الى البقاء يبلغ من الفناء يذود |
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اگر به چشم بديدى جمال ماهم دوش | |
مرا بگو كه در آن حلقه هاى گوش چه بود |
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معاد كل شرود طغى و منه ن آى | |
مثال ظلك ان طال هو اليك يعود |
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وگر تو با من هم خرقه اى و همرازى | |
بگو كه صورت آن شيخ خرقه پوش چه بود |
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بامر حافظ الله المكان يعى | |
بمس عاطفه الله الزمان ولود |
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اگر فقيرى و ناگفته راز مى شنوى | |
بگو اشارت آن ناطق خموش چه بود |
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ايا فواد فذب فى لظى محبته | |
ايا حياه فدومى فقد اتاك خلود |
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وگر نخفتى و از حال دوش آگاهى | |
بگو كه نيم شب آن نعره و خروش چه بود |
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تريد جبر جبير الفواد فانكسرن | |
تريد نحله تاج فلا تنى به سجود |
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از آنچ جامه و تن پاره پاره مى كرديم | |
بيار پارگكى تا كه رنگ و بوش چه بود |
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برغم انفك لا تنكسر كما الحيوان | |
به نصف وجهك لا تسجدن شبيه يهود |
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وگر چو يونس رستى ز حبس ماهى و بحر | |
بگو كه معنى آن بحر و موج و جوش چه بود |
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يقول ليت حبيبى يحبنى كرما | |
اليس حبك تاثير حب ود ودود |
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وگر شناخته اى كاصل انس و جان ز كجاست | |
يكيست اصل پس اين وحشت وحوش چه بود |
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ايا نضاره عيشى بما تهيجنى | |
متى تقر عيونى و صاحبى مفقود |
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وگر بديدى جانى كه پشت و رويش نيست | |
گه تصور عشاق پشت و روش چه بود |
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لان سكرت بما قد سقيتنى يا دهر | |
اكون مثلك لدا لربه لكنود |
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وگر ز عشق تو سردفتر غرض ماييم | |
هزار دفتر و پيغام و گفت و گوش چه بود |