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چو آنان بگذرند از دفتر عشق | |
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در آن آيت كه بازد دلبر عشق |
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به رحمت از پى تشويق ديدار | |
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نمايد لطف و دلجويى بسيار |
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كنند از دل فغان چون بلبل از شوق | |
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طمع بندند بر
وصل گل از شوق |
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تو گويى نور آن آيات رحمت | |
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همى بينند باز ابواب جنت |
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نوازش هاى آن آيات دلبر | |
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قرار از دل ربايد هوش از سر |
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ز عشق افزود آتش ها به دل ها | |
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نمايد گلستان ها ز آب و
گل ها |
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تو گويى در بهشتند آرميده | |
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ز دل هايشان
گل رضوان دميده |
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الهى آتش عشقم برافروز | |
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به لطف خويش بختم ساز فيروز |
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به لطف خود چو آن آزاد مردان | |
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دلم روشن به نور شوق گردان (108) |